Friday, January 20, 2012

_________/)______./¯"""/')
¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯\)¯¯¯¯¯'\_„„„„\)

मैं कुछ कह नहीं पाती,
जब भीग हूँ जाती,
नरम ख्वाबों के मंज़र में,
उफनते सैलाबों के समंदर में,
वीराँ नज़रों के अश्क़ों में,
सुर्ख फूलों की शबनम में,
फ़लक से गिरती रुनझुन में,
फ़ासले तय करती हूँ जाती,
बस मैं कुछ कह नहीं पाती...

_________/)______./¯"""/')
¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯\)¯¯¯¯¯'\_„„„„\)

No comments:

Post a Comment